॥ॐ श्री गणेशाय नम:॥
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सोमवार, 17 दिसंबर 2007

हिन्दुस्तान हमारा है







हिन्दुस्तान हमारा है


हिन्दुस्तान कशमशा रहा है
भारत माँ के अंगो पर
ये कैसा नासुर फैल रहा

देव भूमि पर
कैसा तांडव हो रहा
रंगों की होली छोड़ कर लोग
क्यों खून की होली खेल रहे

एक हमारी संस्कृति सबकी
भारत माँ के बच्चे हम सब
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
फिर बना है दुश्मन क्यों भाई - भाई

आज माँ बिलख रही
अपनी ममता का हिसाब मांग रही
आओ अपनी सोच को
एक नया मोड़ दे
दुश्मनों को जबाब मुँह तोड़ दे
एक आवाज़ सबकी हो
हिन्दुस्तान हमारा है।



-अस्तित्व, यू ए ई

1 टिप्पणी:

बालकिशन ने कहा…

अच्छी कविता लिखी आपने.
देश प्रेम के भावों से ओत-प्रोत.
पसंद आई.